Friday, 22 August 2014


सौरभ के संग खिलते सुमन 
      बौराए मधुप करे गुन-गुन 
गुलशन में आयी बहार सुगंध 
       कुहू कोकिल गाये मिठ्ठी धुन 
ह्रदय कुञ्ज रंग राग उमंग 
       लाल कनेर मस्त गुलमोहर 
चिताकर्षक वन खग विहग 
        बौराए मधुप करे गुन- गुन 

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मुक्तक

इतने बड़े जहाँ मे जी रहा हूँ अकेला 
कोई नही यहाँ मेरा हूँ निपट अकेला
स्वार्थी दुनिया स्वार्थियो का मजमा
निकल गया मै आगे पीछे छूटा मेला

गीतिका

जीवन है एक सुंदर सपना
लगता यहाँ हर कोई अपना 
कभी हँसाती कभी रुलाती 
कभी दिखाती प्यारा सपना 
जैसा भी प्रभु का दिया है
भोग रहे है मान कर अपना 
नही शिकायत इष्ट देव से 
करते सदा उनकी वन्दना 
आराध्य ही पार है लगाते 
आराधना ही ध्येय अपना 
शान्ति पुरोहित 

Tuesday, 19 August 2014


देते ज्ञान गीता का *****देखो कृष्ण सुजान
करो कर्म पार्थ तुम ****कर्ता मुझको मान
कर्ता मुझको मान *****छोड़ो मोह पिपाशा 
अपना पराया छोड़ ****लिखो धर्म परिभाषा
कह शांति समुझाय****झूठ के रिश्ते नाते
महासमर कौंतेय***** केवल धर्म निभाते
****************शान्ति पुरोहित *************

Tuesday, 12 August 2014

स्वाधीनता दिवस के उपलक्ष्य में

स्वाधीनता दिवस के उपलक्ष्य में
आजाद हिन्द
शहीद सहादत
भारत रत्न
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गुलामी बेडी
अगस्त क्रांति तोड़ी
फहरा ध्वज
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तांका 5 7 5 7 7
देश नमन
हिमालय मुकुट
जननी गंगा
सदा जय गुंजित
सर्व धर्म रक्षित
*****************शान्ति पुरोहित
       तुम रानी बनकर राज करोगी जब तुम किसी के घर की शोभा बनोगी |
         तुम जिस घर में जाओगी उस घर का बन्टाधार हो जायेगा |
''तुम बहुत भाग्यशाली हो|
एकदम गुलाब के फुल की तरह सुवासित होजब तुम पैदा हुई ना तो तेरे बाप को अपने व्यापर में बहुत बड़ा आर्डर मिला और हम उतरोतर तरक्की करते गये |
      तुम अभागी होउस कांटे की तरह जो शूल बनकर चुभता है तुम्हारे जन्म के दिन ही तुम्हारे बाप का काम-धन्धा सब चौपट हो गया हम रोटी को भी मोहताज हो गये थे 

धन और सम्पनता लडकी के भाग्य से कब और कैसे जुड़ गया? अर्थ को लडकी से जोड़कर इतना जहर क्यों उगला जा रहा है लडकी उदास बैठी सोच रही है

Monday, 11 August 2014

                                                                        
                                            
 तांका



      कटते वृक्ष 
फाड़ भी कटते 
जल दोहन 
प्रकृति का दोहन 
धरा विनाश सहे 


नियति नटी 
मानव को नचाये 
चाहे ना चाहे 
बहु रंग दिखाए 
मनु जान ना पाए