Monday, 1 September 2014

मुक्तक

जीने की जब भी चाह होती है 
और मुश्किल अथाह होती है
जीत जाते हैं हालात भी गम से 
कोई तो कहीं और राह होती है

8 comments:

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    1. मुकेश कुमार सिन्हा जी बहुत शुक्रिया

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  2. कोई तो कहीं और राह होती है...sahi kaha, na ho..to bhi nikaalni padti hain raahen !

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    1. आभार प्रीति अज्ञात आपका

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  3. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 04/09/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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    1. कुलदीप ठाकुर जी आपका बहुत शुक्रिया मेरी रचना को मान दिया

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  5. कैलाश शर्मा जी आभार

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