Tuesday, 10 March 2015

मुक्तक

मन में रगों की फुहार, हुई उमंग संचार 
बागो में कुहू की गुनगुन छायी मस्त बहार 
जीजा साली ठिठोली अनुपम सा है त्यौहार 
दुर्भाव का करो दहन सद्भाव रंग संचार 
शान्ति पुरोहित

कविता

होली के रंग 
भरते जीवन में उमंग 
फिजा में फूलो की बयार 
बासंती हवा मचाये शोर 
बागो में गुन गुन कुहू गाये राग 
सुर अलापे रस राग
शान्ति पुरोहित

मुक्तक

माँ जैसा प्यार, कहीं नही देखा 
मौन इकरार, कहीं नही देखा
सृजनधर्मिता माँ का संस्कार
माँ का प्रारूप कहीं नही देखा
शान्ति पुरोहित

मुक्तक

मुक्तक
रंग बिरंगा ये समा किया बहुत धमाल
केसर मिश्रित जल और रंग लाल गुलाल 
चंग थाप थिरके सब फाग बहे बयार
होली रंग चुहल में बह गया सब मलाल
शान्ति पुरोहित

मुक्तक

जीवन में सदैव रहे माता का दर्जा ऊँचा 
फर्ज तले दबी रहे दे बेटे को ऊँचा दर्जा 
सर पर आँचल ममता छाँव वाणी में आशीष
ब्रह्मा विष्णु महेश समकक्ष माता का दर्जा ऊँचा
शान्ति पुरोहित

महिला दिवस पर ....

नारी नारायणी 
मंदिर में पूजित 
पेट में मारी जाती 
नारी माँ,बहिन,बेटी,बहू,पत्नी,चाची,बुआ और ना जाने क्या क्या सम्बोधन से बंधी
फर्ज में लिपटी परम त्यागी सहनशीला 
ओरो को ऊँचा उठते देख होठो पर मुस्कान
वाणी पर आशीष
शान्ति पुरोहित

उन्वान

उन्वान 76 रंग 
कृष्ण रंग जीवन का छंट जाय
राग द्वेष मनु ह्रदय से हट जाय
जीवन अट जाय प्रीत रंग संग
प्रेम गुलाल मीत संग बंट जाय 
शान्ति पुरोहित